2019, भाजपा को वोट क्यों..??

पार्ट 1-

मेरा नाम मुरली है और मैं बिहार के चम्पारण (बेतिया) जिला के एक छोटे से गांव धमौरा से हूँ.. मेरे बचपन में आसपास के कई गांवों में जब बिजली नही थी तब मेरे गांव में बिजली आती थी.. ये करीब सन 2000 की बात है.. बड़े-बुजुर्गों से सुनता था करीब दो दशक पहले से हमारे गांव में बिजली आती है.. उस समय मेरा जन्म भी नही हुआ था तो तब के समय की हालत पर सटीक टिप्पणी नही कर सकता, और फ़िलहाल अभी मैं अपना अनुभव आपसे शेयर कर रहा हूँ.. मेरा गांव जमींदारों और नॉकरीपेशा लोगों का रहा है.. हमारा गांव तब भी और आज भी अग्रणी गांवों में गिना जाता है.. हाँ, बात मेरे बचपन की है, होश कब संभाला ये याद तो नही पर सन 2000 के बाद से मोटा-मोटी बहुत बातें याद हैं.. मुझे याद है कि उस वक्त करीब एक-डेढ़ साल तक बिजली रानी एक अनियमित अंतराल पर ही सही, पर हमारे गांव आ जाया करती थी.. फिर अचानक एक वक्त से ऐसे रूठी की वर्षों तक रूठी ही रही.. गाँव के कुछ सज्जनों ने भरपूर कोशिश करी की बिजली रानी फिर हमारे गांव में पधारें, पर ना.. बहुत कोशिशों के बाद भी, काफी मान मनौती करने पर भी नही आयीं.. तब मैं बहुत छोटा था.. नही कह सकता कि मुझे बिजली की कोई लत लगी थी.. पर हाँ, जब शक्तिमान, जूनियर जी और शकालाका बूम बूम में से कोई भी एक सीरियल छूट जाती थी तो मैं बिजली रानी को बहुत कोसता था.. तब मुझे पता नही था कि उस हालत के लिए किसे कोसना चाहिए था.. जब थोड़ा बड़ा हुआ और अक्षरों की जगह शब्दों और वाक्यों की पढाई शुरू हुई तो नींद और भूख का बहाना काम नही आता, अब थोड़ी पढाई से काम नही चल सकती थी.. शाम के समय से मुझे बहुत चिढ़ होती थी, क्योंकि, उधर घर में डीबीया-लालटेन जला नही की खेल बंद करके पढ़ना शुरू नही किया तो हाय – तौबा क्या नही सुनने और झेलने को मिलता..क्या कहें..?? लालटेन की रौशनी में पढ़ने में बड़ी कोफ़्त होती थी.. एक तरफ प्रकाश तो दूसरे तरफ अँधेरा और पढ़ने वाले हम चार भाई-बहन थे.. तब कुछ वैज्ञानिकों ने लैम्प का अविष्कार किआ.. हलाकि वो भी केरोसिन तेल से जलती थी, पर उसकी रौशनी लालटेन से थोड़ी अच्छी और स्पष्ट होती थी.. पता नही उस वक़्त लालूजी ने लालटेन की जगह लैम्प चुनाव चिन्ह क्यूँ नही अपनाया, जो ज्यादा बेहतर थी, अगर अपनाया होता तो शायद अगला चुनाव नही हारते.. शाम में हम बरामदे में ट्यूशन पढ़ा करते थे.. तब गांव में इक्के-दुक्के मोटर गाड़ी ही चला करते थे.. शाम में जब भी कोई गाड़ी का प्रकाश दीवार पर पड़ता तो मैं खुश हो जाता और भगवान से यही दुआ करता काश कुछ देर ये गाड़ी और ठहर जाए.. कितना सुन्दर लगता था वो प्रकाश.. अँधेरा तो कभी सुहाता न था.. मुझे नही पता मेरी उम्र के आसपास के बच्चे कैसा महसूस करते होंगे, तब पास के गांवों में बिजली कभी आयी न थी.. मुझे लगता है वे भी मेरी तरह ही सोचते होंगे, चाहते होंगे की ये गाड़ी की प्रकाश यूँ ही सदा के लिए ठहर जाए.. हाई स्कूल पास कर, जब पहली बार मैं पटना गया तो मुझे सबसे ज्यादा आश्चर्य ये लगा की यहाँ तो चौबीसो घन्टे बिजली रहती है और एक हमारा गांव था जो अभी भी बिजली रानी के संपूर्ण दर्शन को तरस रहा था.. संपूर्ण दर्शन इसलिए की तब कुछ हिम्मती व्यापारी लोगों ने अपनी होशियारी और साहस का परिचय देते हुए जनरेटर चला कर बिजली सप्लाई का धंधा शुरू किया.. तब जाके लोगों को कुछ राहत मिली और बच्चों को दिया-लालटेन की रौशनी में पढ़ने से छुटकारा.. तब मै अपने जिला शहर बेतिया पढता था.. घर आकर अच्छा लगता कि सिमित समय तक ही सही पर अब टीवी देख सकते थे.. पर अभी भी एक बात सबसे ज्यादा चुभती थी की हम आज भी अपने पसंद से टीवी नही देख पाते थे क्योंकि प्राइम टाइम आते आते जनरेटर बंद हो जाता.. शक्तिमान और जूनियर जी को तो हमने कब का अपनी यादों में दफना दिया था.. पर सौरव गांगुली और फिर धोनी भाई की टीम ने ना जाने कौन सा जादू कर दिया (जो अब भी है) कि मैच हमे रेडियो पर सुहाते ही नही थे.. तब कहीं कहीं से बैट्री भाड़ा पर जुगाड़ करके सब इकठ्ठे मैच देखते थे.. रंगीन टीवी अब आ चुका था और दसवीं बोर्ड का एग्जाम भी ख़त्म, सामने वर्ल्ड कप शुरू था अब बैट्री से टीवी चलाना मुश्किल था.. तब हम एक दूसरे के घर तेल-पैसा या यूँ कह लें कि चन्दा इकट्ठा करके सारे मैच देखे और इंडिया को वर्ल्ड कप जिताए.. हमारे फिल्मों और क्रिकेट देखने के शौक से कभी-कभी बाबूजी चिढ़ जाते और गुस्सा जाते.. पर पूरा गांव ही क्रिकेट फिल्मों का शौक़ीन था तो बहुत लोग मैच देखने घर आ जाते तो सिर्फ मुझे क्या कहते, कभी-कभी वो भी इंडिया की बैटिंग देख लेते थे.. बाबूजी तब हमसे मजाक में कहा करते थे कि मैं अपने बेटे की शादी में जनरेटर दहेज़ में लूंगा और तब तुम लोग खूब टीवी देखना.. सच कहूं तो ये मजाक बिलकुल अच्छा नही लगता था.. आखिर क्यों हम अपनी छोटी खुशी भी पूरा नही कर सकते.. उस वक्त तो हम बाकियों से ज्यादा ही शौक पूरा होने की चाहत रखते थे, पर सच ये था कि तब भी बहुत सारे लोग 60 रुपये प्रति बल्ब देने में असमर्थ थे.. तब भी उजाला ठीक से नही हुआ था, अभी भी अधिकतर लोग अँधेरे में ही रहने को मजबूर थे.. ये हालत सिर्फ हमारे गांव की नही, हमारे जैसे लाखों गांव की होगी जो इक्कीसवीं सदी के एक दशक बित जाने के बाद भी बिजली के दर्शन नही कर पाए थे.. अँधेरे में ही रहना हम सबकी मजबूरी थी पर पता नही दशकों तक राज करने वाले सरकार की क्या मज़बूरी थी, जो छः दशक तक राज करने के बावजूद भी भारत को अंधरे में ही जीने को मजबूर किए हुए थे.. भारत धन्य हुआ कि वक्त बदला, सरकार बदली, सोच बदली.. भाजपा की सरकार सत्ता में आयी और वर्तमान सरकार ने महसूस किया कि हिंदुस्तान चंद शहरों में ही नही गाँवो में बसता है.. और तब जाके गांवों की सुध ली गयी, गांव की सूरत बदली.. इस नेक कार्य के लिए पूरा भारत मोदी और उनके सरकार की और उन सभी लोगों की जिन्होंने देश की खुशहाली में साथ दिया- सबका शुक्रगुजार है.. सही मायनों में बात की जाए तो बिजली सिर्फ शौक की नही बल्कि एक खुशहाल, संपन्न और सुविधापूर्ण जिंदगी (जिसे सबको जीने का हक़ है) व्यतीत करने के लिये नितान्त आवश्यक है…

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Don’t cry, Forgive yourself..!!

It’s not easy to forget someone who had become your habit. There’s going to be a lot of negative energy. At the end of the day, if someone truly wants to be in your life, they will be. They will make the effort. If they do not, let that be your closure. Don’t ruin them in your mind. Miss them but don’t ache for them to come back. You don’t have to hate them. Love every lesson they taught you. Focus on the ones who stayed, focus on the ones who appreciate you and respect you. Don’t hold grudges. The more anger towards the past you carry in your heart, the less capable you are of loving in the present. Forgive yourself for trusting the wrong person, for choosing the wrong path, for the chances you didn’t take, for not being there for yourself. You couldn’t have predicted the future. There will always be chances to start over. It’s okay to not have all the answers. It’s time to let go of every disappointment. You get to bury each mistake you made. What matters most is how you heal from these heartbreaks. Learn how to forgive yourself…

Life Lessons

This is life. People will screw you over. You’ll fight with your family. You’ll witness things that will change you forever. You’ll blame new lovers for things old lovers did. You’ll lose best friends you thought would always be there. You’ll come to realize that everyone has a past. You’ll cry, you’ll laugh,and you’ll embarrass yourself. But then, you’ll find your very own moment where none of that matters; where you can sit back and realize that crap happens to the people who can handle it and that this is who you are, and that no one should want to change you, including yourself….!!

#LifeLessons

Most and more…

If you keep doing the same stuff,
you will keep getting the same results..

If you walk the path everyone walks,
you will only reach where everyone reaches..

A breakthrough necessitates break with.
Path-breakers become pathfinders..

Abundance is your birthright.
You deserve most and more..

And, there is a way… 🙂

#Ra